Friday, 16 November 2018

NT24 News : दो दिवसीय उत्तर भारतीय एमएसएमई कनक्लेव


दो दिवसीय उत्तर भारतीय एमएसएमई कनक्लेव
 आपकी कहानी-आपकी जुबानी
में  छह राज्यों के लघु उद्योगपति करेंगे समस्याओं पर मंथन,
आज हरियाणा,पंजाब,हिमाचल के अधिकारी भी रहेंगे मौजूद
एन टी 24 न्यूज़
चंडीगढ
लघु,मध्यम एवं सूक्षम उद्योग (एमएसएमई) सैक्टर को अगर मजबूत किया जाएगा तो ही देश आर्थिक रूप से तरक्की करेगा। इसी उद्देश्य के साथ पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के तत्वाधान में बृहस्पतिवार से दो दिवसीय उत्तर भारतीय एमएसएमई कनक्लेव आपकी कहानी-आपकी जुबानीयहां शुरू हुआ । कनक्लेव का औपचारिक उदघाटन करते हुए पंजाब उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव विन्नी महाजन ने कहा कि लघु एवं मध्यम उद्योग जितना तेजी से विकसित होगा उतनी ही तेजी से बेरोजगारी की समस्या समाप्त होगी । उन्होंने कहा कि एमएसएमई सैक्टर में जहां लोगों को सीधे रोजगार मिलता है वहीं इसके साथ जुडक़र हजारों लोग घर बैठे ही आमदन का साधन पैदा करते हैं । पंजाब सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि पंजाब देश का सबसे खुशहाल प्रांत है। यहां सरकार द्वारा इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई नई योजनाएं शुरू की गई हैं । इस अवसर पर बोलते हुए आरबीआई की क्षेत्रीय निदेशक सुश्री रचना दीक्षित ने कहा कि एमएसएमई सैक्टर को मजबूती प्रदान करने के लिए बैंकों द्वारा जहां कई योजनाएं चलाई जा रही हैं वहीं ऋण की वसूली पर भी अपनी शर्तें नरम की हैं। इस अवसर पर बोलते हुए पीएचडी चैंबर के मानद सलाहकार सी.एम.कृष्णा ने कहा कि एमएसएमई के लिए गठित की गई 12 सूत्रीय नीति तभी कारगर सिद्ध होगी जब अंतिम छोर पर काम करने वाले सूक्ष्म उद्यमी को इसका लाभ व सही जानकारी मिले। केंद्र व राज्य सरकारों ने एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए करीब 150 संगठन स्थापित किए हैं लेकिन अधिकतर का संचालन नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि लघु एवं मध्यम उद्योगों को तो सरकार की योजनाओं का लाभ मिल रहा है लेकिन सूक्ष्म उद्योग इससे अभी भी वंचित हैं । ऐसे आयोजन न केवल सूक्ष्म उद्यमियों की समस्याओं को उजागर करते हैं बल्कि समाधान के विकल्प भी तलाश करते हैं । इस अवसर पर बोलते हुए जर्मन आधारित विश्व स्तरीय स्वयं सेवी संगठन कोनराड एद्यन्यौर स्टीफतुंग (कैस) के भारत में कार्यक्रम अधिकारी पंकज मदान ने बताया कि कैस व पीएचडी चैंबर द्वारा इस साल अपने भागेदारी के तीस साल पूरे करने जा रहा है । जिसके चलते दोनों संगठनों द्वारा ग्रामीण विकास, पंचायती राज की मजबूती व एमएसएमई को प्रोत्साहन आदि अभियान को चलाया जा रहा है । दोनों देशों के एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत युवाओं में नेतृत्व क्षमता व प्रजातांत्रिक माहौल को मजबूत करने का प्रयास भी जारी है । उदघाटन कार्यक्रम के दौरान एसबीआई के मुख्य महाप्रबंधक राणा आशुतोष कुमार सिंह ने विभागीय योजनाओं के बारे में बताया। इस अवसर पर पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स के चंडीगढ़ चैप्टर के चेयरमैन विक्रम सहगल, पंजाब चैप्टर के चेयरमैन आर.एस. सचदेवा ने आए हुए अतिथियों का आभार व्यक्त किया । पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स की क्षेत्रीय निदेशक मधु पिल्ले ने बताया कि शुक्रवार को कनक्लेव के दूसरे दिन सभी राज्यों के उद्यमी अपने-अपने राज्यों के अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याओं को रखेंगे । जिनका यहां पर ही निदान किया जाएगा ।


NT24 News : International Day for Tolerance Celebrated with Involving young students from from two Colleges & four Schools


International Day for Tolerance Celebrated with Involving young students from from two Colleges & four Schools
 National Tele24 News
Chandigarh
Today, under a ‘1 India’ campaign started by Yuvsatta-an NGO, International Day for Tolerance was celebrated with organization of an Interfaith Harmony Meet, at Peoples Convention Centre, by Yuvsatta-an NGO, Dev Samaj College of Education and Peoples Convention Centre. 100 Students from two colleges namely Chandigarh Institute of Hotel Management & Catering Technology (CIHM), Dev Samaj College of Education, and four Schools of Delhi Public School, Carmel Convent School, New Public School, St. Stephen’s School, Sector 45B, Chandigarh participated. Prominent speakers included Father Lawrence Benedict of Christ the King Cathedral, Sector 19, Moulana Mohd. Ajmal Khan, Imam, Jama Masjid, Sector 20A, Prof. Kulwant Singh, President, Institute of Sikh Studies, Chandigarh and  Prof. Shyam Sunder of Shri Hanuman Teerath, Sector 25, Panchkula. Addressing the gathering Prof. Shyam Sunder shared that Indian civilization which is based on co-existence of faiths - Sarva Dharma Sambhava, implies equal respect for all Dharmas. Elaborating this, Vivekananda used the metaphor of many rivers flowing into one mighty ocean. Prof. Kulwant Singh added that all religions lead to the same God and differences among them are not essential. Indeed, the goal of every religion is the same. The spirit of the founders of the different religions was the same though rituals differ. Moulana Mohd. Ajmal Khan said that Islam teaches peace and love for mankind. And to combat all forms of expression which incite sectarian hatred, society as a whole should take action against dissemination of such material in the mass media. Government should introduce inter-religious education in schools as part of the curriculum so as to promote communal harmony. Father Lawrence emphasized that first we should promote unity in families first, which will lead us to a united country. And we also should believe in our young people. If we need a strong India, we have to first make our youth strong by inculcating values of right speech, thinking and action. And this process in a systematic manner should start from childhood. Taking part in this discussion Sukaina class 8th student of Carmel Convent School shared that she feel happy to study in a School where equal treatment for all students irrespective of their economic or religious background is practiced. And for permanent peace this spirit should percolate in our society as well. Shatakshi Badhan of Delhi Public School added that it is prerequisite for a strong country that all young people should not only stand for our rights but for rights of others as well. Faiz Ansari a Class 10th students of New Public School was of the view that spirit of oneness is need of the hour and it can only be promoted if instead of ‘I’, all people believe in power ‘We’.
   In her concluding remarks Prof. Gurdev Kaur, former Principal of Government College, Derrabasi, mentioned that “India has been home for centuries to all great religions of the world and has learnt to live together, grow together and learn together. And even as each one of us remains devoted to our own individual faith, we have learnt to respect the faith of another. This has been the basis of our nationhood.”
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NT24 News : राष्ट्रिय वैदिक संगोष्ठी की गूञ्ज सुनी मोरिशस तक.....


राष्ट्रिय वैदिक संगोष्ठी की गूञ्ज सुनी मोरिशस तक
एन टी 24 न्यूज़ 
चंडीगढ़ 
विश्वविद्यालय की दयानन्द अध्ययन वैदिक पीठ के द्वारा आयोजित "राष्ट्रिय वैदिक संगोष्ठी" में  भारत के विभिन्न प्रदेशों से विद्वानों ने शिरकत की वहीं इसकी गूञ्ज विदेशों तक भी सुनाई दी । विदेशों में रहने वाले संस्कृत तथा  वैदिक विद्वानों ने इस कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की, वहीं मोरिशस के वैदिक विद्वान श्री ज्ञान धनूक चन्द जी इस कार्यक्रम मे विशेष रूप से पहुँचे । उनके पहुँचने की सूचना प्राप्त होते ही माननीय वी.सी साहब ने  प्रो वीरेन्द्र  अलंकार जी के साथ वी. सी आफिस में उनका आवाहन  किया । यहाँ उन्होनें माननीय वी. सी प्रो. राजकुमार जी को  वैदिक शोध पर लिखी अपनी नवीन पुस्तक " माडर्न इण्डियन रिफार्मरस" भेंट करते हुए इस कार्यक्रम के आयोजन पर बधाई दी तथा यह विश्वास दिलाया कि मारिशस का संस्कृत विभाग  पी यू के संस्कृत विभाग से मिलकर वैदिक शोध करेगा । तदुपरान्त माननीय वी. सी साहब ने इस कार्यक्रम के आयोजक तथा महर्षि दयानन्द चेयर के वर्तमान अध्यक्ष प्रो. डा. वीरेन्द्र अलंकार जी को अपने आफिस में विशेष रूप से बधाई देते हुए संस्कृत साहित्य तथा वैदिक शोध में मोरिशस तथा अन्य देशों के विद्वानों के योगदान लेने पर सहमति जताई ।

Thursday, 15 November 2018

NT24 News : Seminar on the ‘The Tradition of Vedic Studies in Punjab & Social Value’ at PU

Seminar on the ‘The Tradition of Vedic Studies in Punjab & Social Value’ at PU
 National Tele24 News
Chandigarh
‘Punjab is the Karmabhumi of the Gurus, and the roots of knowledge run deep in this land’, stated Sh. V.P. Singh Badnore, Hon’ble Governor of Punjab and Administrator, UT, Chandigarh, while inaugurating the Seminar on ‘The Tradition of Vedic Studies in Punjab & Social Value’, here today, which was organized by the Dayanand Chair for Vedic Studies, Panjab University, Chandigarh. He further stated the since time immemorial, Punjab has contributed to the learning and teaching of the Vedas. Innumerable scriptures and texts have been written in this land. On the one hand Punjab enriched the nation with food, and on the other it has been a leader in showering knowledge, he added. In the modern era, it was Maharshi Dayanand Saraswati who made the hymns of the Vedas resonate in the land of Punjab. The Hon’ble Governor further added that the message of social values would be a help in making human a human, because the message of the Ved is this: Come together let us move forward, let us speak together, let us try to understand each others mind. He promised every kind of support to the Chair. Prof. Raj Kumar, Vice Chancellor, Panjab University, Chandigarh, in his address said that PU is fortunate that on the land of  Vedas, Knowledge and Penance, it is conducting research on the Vedas. He further informed that in the last 43 years, this Chair has given many scholars to the Vedic world and has produced more than 70Ph.D. He informed that efforts are being made by PU for tization
of ancient manuscripts. Keynote speaker, Prof. Kamlesh Kumar Choksi, from the Gujarat niversity, spoke about the practical aspects of the Vedas and Vedic Civilisation, from reservation of texts, to their teaching and interpretation, ultimately leading to a grassroot level application of India’s ancient wisdom. Dr. Virupaksh Jaddipal, Secretary Sandipani Rashtriya Vedavidya Pratisthan, emphasised the study of Vedas as the source of all knowledge. Prof. Virendra Kumar Alankar, Chairperson, Dayanand Chair for Vedic studies, threw light upon the Punjab connection of the Vedas, which is the subject of the seminar which will conclude on 16th ovember 2018. 

NT24 News : पर्वों से भरपूर नवंबर मास


पर्वों से भरपूर नवंबर मास
कार्तिक मास हमारे देश में बहुत महत्व रखता है । इसी महीने में दिवाली, छठ पूजा ,भष्म पंचकों का लगना, देवताओं का शयन के बाद उठना, तुलसी विवाह, वैकुण्ठ चतुर्दशी , कार्तिक पूर्णिमा पर गुरु नानक देव जी की जयंती आदि के उत्सवों का आना , दैनिक जीवन में बहुत परिवर्तन लाता है। इसी संदर्भ में 19 नवंबर, सोमवार को देव प्रबोधिनी एकादशी तथा 20 को तुलसी विवाह पड़ रहे हैं।
19 नवंबर - देव उठनी एकादशी

ऐसी मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी होती हैजबभगवान श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में 4 माह के शयन के लिए चले जाते हैंइन चार महिनों केदौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता.कार्तिक शुक्ल एकादशी वर्ष की सबसे बड़ी एकादशी होती हैइस दिन चातुर्मास का समापनहोता है और भगवान विष्णु चार महीने के विश्राम के बाद पुनः धरती का कार्यभार संभालने केलिए जाग उठते हैं। इस दिन से चार महीने से बंद विवाह पुनः प्रारंभ हो जाते हैं। इस एकादशीको देव उठनी एकादशी  देव प्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है शास्त्रों में इस एकादशी का सर्वाधिक महत्व बताया गया है। इस एकादशी के व्रत को करने कातो अपना महत्व है ही इस दिन सुखसमृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए कई तरह केउपाय भी किए जाते हैं क्योंकि भगवान विष्णु अपनी शैया से जागते ही भक्तों को आशीर्वाददेने के लिए आतुर रहते हैंदेवउठनी एकादशी के दिन से शादियों का शुभारंभ हो जाता हैसबसे पहले तुलसी मां की 
पूजाहोती हैदेवउठनी एकादशी के दिन धूमधाम से तुलसी विवाह का आयोजन होता हैतुलसी जीको विष्णु प्रिया भी कहा जाता हैइसलिए देव जब उठते हैं तो हरिवल्लभा तुलसी की प्रार्थनाही सुनते हैं.देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी जी का विवाह शालिग्राम से की जाती हैअगर किसी व्यक्तिको कन्या नहीं है और वह जीवन में कन्या दान का सुख प्राप्त करना चाहता है तो वह तुलसीविवाह कर प्राप्त कर सकता है.
देवउठनी एकादशी पारण मुहूर्त : 20 नवंबर कोसुबह 06:47:17 से 08:55:00 तक
अवधि : 2 घंटे 7 मिनट

देव उठनी एकादशी का व्रत समस्त प्रकार के पापशोकदुखसंकटों का नाश करने वालाहोता है। इसलिए आप वर्ष की कोई एकादशी पर व्रत नहीं रखते होंलेकिन इस एकादशी केदिन व्रत जरूर रखें। इस दिन सूर्योदय पूर्व जागकर स्नान कर भगवान 
विष्णु का विधिवतपूजन करें एकादशी व्रत का संकल्प लें और एकादशी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण
 करेंदेव उठनी एकादशी के दिन अपने पूजा स्थान में एक मिट्टी के कलश में मिश्री भरकर उस परसफेद वस्त्र बांधें और उपर एक श्रीफल रखें कलश पर स्वस्तिक बनाएं और इसका विधिवतपूजन कर किसी ब्राह्मण को दान करें इससे आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं जिन लोगों के विवाह में बाधा  रही हो कई प्रयासों के बाद भी विवाह की बात नहीं बन पारही होवे युवकयुवतियां देवउठनी एकादशी के दिन प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में जाग जाएं। जबआकाश में तारे होंतभी स्नान करें और लक्ष्मीविष्णु की पूजा कर विष्णुसहस्रनाम के 7 पाठकरें। महालक्ष्मी और विष्णु को मिश्री का भोग लगाकर अपनी मनोकामना कहें। शीघ्र विवाहका मार्ग प्रशस्त होगा।जिन दंपतियों का विवाह कष्टपूर्ण चल रहा हो पतिपत्नी के संबंधों कटुता होवे देवउठनीएकादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण का मंत्र ओम् कृं कृष्णाय नमः मंत्र की एक माला जाप करेंश्रीकृष्ण को माखनमिश्री का भोग लगाएंवैवाहिक जीवन में शांति आएगी और पतिपत्नी केसंबंध मधुर बनेंगेआर्थिक संकटों और कर्ज से मुक्ति के लिए एकादशी का व्रत करेंशाम के समय पूजा स्थान मेंलाल रंग के उनी आसान पर बैठकर ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की एक माला जापकरें। भगवान विष्णु को हलवे का नैवेद्य लगाएं और तुलसी में प्रतिदिन शाम के 
समय दीपकलगाना प्रारंभ करें।एकादशी के दिन से प्रारंभ करके लगातार 21 दिन पीपल में कच्चा दूध 
और पानी मिश्रितकरके चढ़ाना प्रारंभ करें पीपल के वृक्ष की जड़ से थोड़ी सी गीली मिट्टी लेकर मस्तक औरनाभि पर लगाएंरोग मुक्ति होने लगेगीजीवन में लगातार कोई  कोई परेशानी बनी हुई हो बेवजह के संकट  रहे हों तो एकादशीके दिन शाम के समय तुलसी विवाह संपन्न कराएंकिसी कन्या को भोजन करवाकर उसेवस्त्र,श्रृंगार का सामान भेंट देंप्रेमआकर्षण और सम्मोहन प्राप्ति के लिए देवउठनी एकादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण औरराधाजी का श्रृंगार करेंउन्हें वस्त्रमुकुट पहनाएं और माखन का भोग लगाएं इसके बादत्रेलोक्य मोहनाय नमः मंत्र की 21 माला जाप करेंआपके व्यक्तित्व में एक अद्भुत आकर्षणपैदा हो जाएगायह एकादशी सुखसौभाग्य और उत्तम संतान प्रदान करने वाली एकादशी भी कही गई हैइसलिए संभव हो तो पतिपत्नी दोनों जोड़े से इस व्रत को करें और फिर देखें उनके जीवन मेंकितनी तेजी से परिवर्तन आता हैइस एकादशी के दिन तुलसी विवाह संपन्न कराने से परिवार में कोई संकट नहीं रहतासमस्तसुखों की प्राप्ति होती हैइस दिन दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है ।
मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्, चंडीगढ़, 9815619620


NT24 News : 6th edition of Literati 2018


6th edition of Literati 2018
-        Piyush Mishra, Preeti Shenoy, Vineet Bajpai, Shiv Khera, Gurcharan Das among others to interact. 
National Tele24 News
Chandigarh
The 6th edition of Chandigarh Literary Society’s annual premier literary event, Literati 2018, shall be held on 17-18 November at the Lake Club. The two days literary festivities shall feature noted authors, Bollywood directors, writers, lyricists and story telling worshops, besides evening cultural programmes. Literati 2018 shall be kicked off with noted Bollywood Indian film and theatre actor, music director, lyricist, singer and scriptwriter Piyush Mishra in conversation with CLS Chairperson Dr Sumita Misra, IAS, in the session ‘Kuch Ishq Kiya, Kuch Kaam Kiya’ Harinder Sikka of Raazi fame would share his journey from ‘Calling Sehmat to Raazi’, while another best-selling author Preeti  Shenoy would be talking about ‘Breaking the Rules’. Another interesting session would be ‘Sarkari Perspective’ with Deepak Gupta, MG Devashayam and IPS officer and author Gurjot Kaler as moderatopr. Keshav Aneet, Ajay Pandey, Devanshi Sharma and Sonia Shandilya would discuss ‘Love Bug Bites’ and ‘Stripping the Comic’ shall have Aabid Surti, Rishi Kumar and Chetna Kheer exploring the literature in lighter vein. Famous writer Vineet Bajpai along with Aditya Iyengar, Anuja Chandramouli shall be taling about ‘From Myth to Mythology’ in the last session. A popular play, ‘Halala’ of Bhagwandass Morwal’s musical classic shall be held at the Tagore Theatre. British Council will be holding a worshop on story telling which Jaishree Sethi would be conducting on second day. Attractions on the second day include world-renowned motivational speaker Shiv Khera, author and public intellectual Gurcharan Dass, Siddhartha Giggo, festival director of the New York Indian Film Festival Aseem Chhabra would be attraction on second day morning session. Panjabi Session would have Jaani, Shamsher Sandhu, Masha aur and Charan Lihari, while The Balancing Act will have Gita Aravamudan and Prachi Garg in conversation with Sagunja Jain. Leadership spekaers and trainers Vivek Atray, Anisha Motwani, and Vineet Bajpai would focus on motivational aspects with author Suditi Jindal. The evening session would have an interesting Urdu storytelling performance, Dastaan Goi.

NT24 News : मनाएं तुलसी विवाह 20 नवंबर , मंगलवार को.....


मनाएं तुलसी विवाह 
20 नवंबर , मंगलवार को
तुलसी विवाह एक बहुत ही पवित्र त्योहर है इस दिन तुलसी के पौधे की शालीग्रम (पत्थरसे शादीकी जाती है ये शादी भी अन्य शादियों की तरह मनाई जाती है।नए नए कपड़े डाले जाते हैंमंडप सजता हैफेरे होते हैं और दावत भी दी जाती हैइस साल तुलसी विवाह 20/2018 को  रहा है । दरअसल चार महीने तकदेवता सोए हुए होते हैं और इस दौरान सिर्फ पूजा पाठ ही होता है कोई शुभ कार्य नहींहोता है देव उठनी के दिन सभी जागते हैं और मुहुर्त भी खुल जाते हैं देवताओं केउठने के बाद पहला शुभ कार्य होता है तुलसी विवाह तुलसी विवाह कार्तिक एकादशीके अगले दिन होता है ।
कैसे होता है विवाह  ?

विवाह में सब कुछ आम विवाह की तरह ही होता है बस दुल्हन की जगह होता हैतुलसी का पौधा और दुल्हे की जगह शालीग्राम  शालीग्राम असल में
 विष्णु भगवान हैं ।घर सजाया जाता है मंडप लगता है सबसे पहले तुलसी के पौधे को लाल चुनरीओढ़ाई जाती है 16 श्रंगार का सामान चढ़ाया जाता है अग्रि जलाई जाती है,
शालिग्राम और तुलसी को हाथ में पकड़ कर फेरे दिलाए जाते हैं विवाह के बादप्रीतिभोज का आयोजन किया जाता है विवाह में महिलाएं विवाह गीत और भजनगाती हैं ।
कथा
कहा जाता है कि बहुत सदियों पहले एक जालंधर नाम का असुर था । वो हमेशा हीदेवताओं को हरा देता । हर तरफ उसने क्रूरता फैला रखी थी उसकी ताकत के पीछेथी उसकी पत्नी वृंदा और उसका पतिव्रता धर्म जालंधर से परेशान देवताओं ने विष्णुसे गुहार लगाई तब विष्णु ने जालंधर की पत्नी का सतीत्व नष्ट  कर दिया सतीत्वखत्म होते ही जालंधर असुर युद्ध में मारा गया वृंदा ने विष्णु को श्राप दिया कि तुमअब पत्थर के बनोगे विष्णु बोलेहे वृंदायह तुम्हारे सतीत्व का ही फल है कि तुमतुलसी बनकर मेरे साथ ही रहोगी । जो मनुष्य तुम्हारे साथ मेरा विवाह करेगावहपरम धाम को प्राप्त होगा ।
तुलसी विवाह
तुलसी विवाह कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को संपन्न की जाती है इसदिन को देवउठनी एकादशी भी कहा जाता हैहिंदू मान्यता के अनुसार इस दिनभगवान विष्णु रूपी शालिग्राम का विवाह तुलसी से होता हैसाथ ही इस दिनभगवान विष्णु चार महीने तक सोने के बाद जागते है इस दिन तुलसी पूजा औरतुलसी विवाह करने का बडा ही महत्व है। तुलसी विवाह को लोग बहुत ही धूमधामऔर श्रद्धा भाव के साथ मनाते है। शास्त्रों के अनुसारतुलसी जी को भगवान विष्णुका प्रिय कहा गया है विष्णु जी की पूजा के लिए तुलसी दल अर्थात् तुलसी के पत्तेहोना जरूरी होता है। बिना तुलसी दल के भगवान विष्णु की पूजा करना अधूरा मानाजाता है।
तुलसी विवाह का महत्व

तुलसी विवाह संपन्न करवाने से व्यक्ति के सभी जन्मों के पाप नष्ट हो जाते है । उस स धरती के सारे सुख प्राप्त होते है। लोग तुलसी विवाह करवाते हैउनकावैवाहिक जीवन सुखमय होता है।तुलसी हर घर में होती हैतुलसी की सेवा और पूजाकरना महान पुण्य माना जाता है जिस घर में तुलसी जी की पूजा होती हैउस घर मेंकभी भी धन –धान्य की कमी नहीं होती है। यदि किसी घर में लड़के या लड़की की शादी में अड़चन  रही होतो उन्हें जरूरतुलसी विवाह करवाना चाहिए। ऐसा करने से विवाह की सारी अड़चनें दूर हो जातीहै।
पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार जालंधर 
नामक एक राक्षस था उसने चारों तरफ बड़ाउत्पात मचा रखा था और वह बड़ा वीर तथा पराक्रमी था उसकी वीरता का रहस्यथा,  उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रता धर्म उसी के प्रभाव से उसके पति को सुरक्षा कवचप्रदान हुआ जालंधर के 
उपद्रवों से परेशान देवगण भगवान 
विष्णु के पास गये तथाउनसे रक्षा करने की प्रार्थना की उनकी प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु ने वृंदा कापतिव्रता धर्म भंग करने का निश्चय कियाउन्होंने जालधंर का रूप धारण करके छल से वृंदा को स्पर्श किया वही वृंदा का पतिजालंधरजो  देवताओं  से युद्ध कर रहा था वृंदा का सतीत्व नष्ट होते ही मारा गयाजब वृंदा को इस बात का पता लगा तो क्रोधित होकर उसने भगवान विष्णु को श्रापदे दिया जिस प्रकार तुमने छल से मुझे पति वियोग दिया हैउसी प्रकार तुम भीअपनी स्त्री का छलपूर्वक हरण होने पर स्त्री वियोग सहने के लिए मृत्यु लोक में जन्मलोगे। यह कहकर वृंदा अपने पति के साथ सती हो गईजिस जगह वह सती हुई वहाँतुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ ।
एक अन्य कथा
एक अन्य प्रसंग के अनुसार वृंदा ने विष्णु जी को यह श्राप दिया था कि तुमने मेरासतीत्व भंग करने के अपराध में तुम ह्दयहीन पत्थर बन जाओl तब भगवान विष्णुबोलेहे वृंदायह तुम्हारे सतीत्व का ही फल है कि तुम तुलसी बनकर सदा मेरे साथही रहोगी। जो मनुष्य तुम्हारे साथ मेरा विवाह कराएगावह परम धाम को प्राप्तहोगा। बिना तुलसी दल के शालिग्राम या विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाएगी शालिग्राम और तुलसी का विवाह भगवान विष्णु और महालक्ष्मी के विवाह का प्रतीकात्मक विवाह है ।
मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्, चंडीगढ़, 9815619620