Friday, 17 August 2018

* आज का हिन्दू पंचांग * ..... Vinay Kumar


* दिनांक - 18 अगस्त 2018 *,  * दिन – शनिवार *, * विक्रम संवत – 2075 *, * शक संवत -1940 *, * अयन – दक्षिणायन *, * ऋतु – वर्षा *, * मास – श्रावण *, *  पक्ष – शुक्ल *, * तिथि - 19/8 रात्रि 01:47 तक अष्टमी *, * नक्षत्र - शाम 05:21 तक विशाखा *, * योग - शाम 02:55 तक ब्रह्म *, * राहुकाल - सुबह 09:19 से 10:54 *, * सूर्योदय - 06:18 *, * सूर्यास्त - 19:06 *,  * दिशाशूल - पूर्व दिशा में *, * व्रत पर्व विवरण *, * विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) *, * अष्टमी तिथि के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38) *, * चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण) *, * चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है । *, * ब्रह्म पुराण' के 118 वें अध्याय में शनिदेव कहते हैं- 'मेरे दिन अर्थात् शनिवार को जो मनुष्य नियमित रूप से पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उनके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उनको कोई पीड़ा नहीं होगी। जो शनिवार को प्रातःकाल उठकर पीपल के वृक्ष का स्पर्श करेंगे, उन्हें ग्रहजन्य पीड़ा नहीं होगी।' (ब्रह्म पुराण') *, * शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करते हुए 'ॐ नमः शिवाय।' का 108 बार जप करने से दुःख, कठिनाई एवं ग्रहदोषों का प्रभाव शांत हो जाता है। (ब्रह्म पुराण') *, * हर शनिवार को पीपल की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से अनेक प्रकार के कष्टों का निवारण होता है ।(पद्म पुराण) *,
* सेवफल (सेब) *
 * प्रातःकाल खाली पेट सेवफल का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। सेब को छीलकर नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसके छिलके में कई महत्त्वपूर्ण क्षार होते हैं। इसके सेवन से मसूड़े मजबूत व दिमाग शांत होता है तथा नींद अच्छी आती है। यह रक्तचाप कम करता है। *, * सेब वायु तथा पित्त का नाश करने वाला, पुष्टिदायक, कफकारक, भारी, रस तथा पाक में मधुर, ठंडा, रुचिकारक, वीर्यवर्धक हृदय के लिए हितकारी व पाचनशक्ति को बढ़ाने वाला है। *, * सेब के छोटे-छोटे टुकड़े करके काँच या चीनी मिट्टी के बर्तन में डालकर चाँदनी रात में ऐसी खुली जगह में रखें जहाँ उसमें ओस पड़े। इन टुकड़ों को सुबह एक महीने तक प्रतिदिन सेवन करने से शरीर तंदुरुस्त बनता है। *, * कुछ दिन केवल सेब के सेवन से सभी प्रकार के विकार दूर होते हैं। पाचनक्रिया बलवान बनती है और स्फूर्ति आती है। *, * युनानी मतानुसार सेब हृदय, मस्तिष्क, यकृत तथा जठरा को बल देता है, खून बढ़ाता है तथा शरीर की कांति में वृद्धि करता है। *, * इसमें टार्टरिक एसिड होने से यह एकाध घंटे में पच जाता है और खाये हुए अन्य आहार को भी पचा देता है। *, * सेब के गूदे की अपेक्षा उसके छिलके में विटामिन सी अधिक मात्रा में होता है। अन्य फलों की तुलना में सेब में फास्फोरस की मात्रा सबसे अधिक होती है। सेब में लौहतत्त्व भी अधिक होता है अतः यह रक्त व मस्तिष्क सम्बन्धी दुर्बलताओं के लिए हितकारी है। *,
* औषधी प्रयोग *
* रक्तविकार एवं त्वचा रोगः रक्तविकार के कारण बार-बार फोड़े-फुंसियाँ होती हों, पुराने त्वचारोग के कारण चमड़ी शुष्क हो गयी हो, खुजली अधिक होती हो तो अन्न त्यागकर केवल सेब का सेवन करने से लाभ होता है। *, * पाचन के रोगः सेब को अंगारे पर सेंककर खाने से अत्यंत बिगड़ी पाचनक्रिया सुधरती है। *, * दंतरोगः सेब का रस सोडे के साथ मिलाकर दाँतों पर मलने से दाँतों से निकलने वाला खून बंद व दाँत स्वच्छ होते हैं। *, * बुखारःबार-बार बुखार आने पर अन्न का त्याग करके सिर्फ सेब का सेवन करें तो बुखार से मुक्ति मिलती है व शरीर बलवान बनता है। *
* सावधानीः सेब का गुणधर्म शीतल है। इसके सेवन से कुछ लोगों को सर्दी-जुकाम भी हो जाता है। किसी को इससे कब्जियत भी होती है। अतः कब्जियत वाले पपीता खायें। *
* वास्तु शास्त्र *
* मेन गेट के सामने गंदा पानी इकट्ठा रहता हो तो घर के लोगों को धन संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ता है। *
* पति-पत्नी के झगड़े या अनबन *
* पति-पत्नी में झगड़े होते हों, तलाक की नौबत आ जाए अथवा पति-पत्नी में मन नहीं बनता है तो पति अपने सिर के नीचे सिन्दूर रख के सो जाए और पत्नी अपने सिर के नीचे कपूर रख के सो जाए । सुबह उठे तो कपूर की आरती कर डालें और पति सिन्दूर घर में फ़ेंक दें, तो पति-पत्नी का स्वभाव अच्छा हो जायेगा । *


* आज का हिन्दू पंचांग *.... Vinay kumar


दिनांक - 17 अगस्त 2018*, * दिन – शुक्रवार *,  * विक्रम संवत – 2075 *, * शक संवत -1940 *, * अयन – दक्षिणायन *, * ऋतु – वर्षा *, * मास – श्रावण *, * पक्ष – शुक्ल *, * तिथि - 18/8 रात्रि 01:00 तक सप्तमी *, * नक्षत्र - शाम 04:11 तक स्वाती *, * योग - शाम 03:34 तक शुक्ल *, * राहुकाल - सुबह 10:54 से 12:30 *, * सूर्योदय - 06:18 *, *सूर्यास्त - 19:06* ,  *दिशाशूल - पश्चिम दिशा में *, * व्रत पर्व विवरण - संत तुलसीदास जयंतीविष्णुपदी संक्रांति  (पुण्यकाल सुबह 06:52 से दोपहर 01:16 तक) *, * विशेष - सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा  शरीर का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराणब्रह्म खंडः 27.29-34) *, * चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण) *, * चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है ।*,
* श्रावण शनिवार *
* बहुत लोगों को श्रावण शनिवार का पूरे वर्ष इंतज़ार रहता है। *,
* स्कन्दपुराण के अनुसार *
* " श्रावणे मासि देवानां त्रयानां पूजनं शनौ। नृसिंहस्य शनैश्चव्य अञ्जनीनन्दनस्य च ।।" *, * श्रावण मास में शनिवार के दिन नृसिंह, शनि तथा अंजनीपुत्र हनुमान इन तीनों देवताओं का पूजन करना चाहिए। *,
* शिवपुराण के अनुसार*
* अपमृत्युहरे मंदे रुद्राद्रींश्च यजेद्बुधः ॥ *, * तिलहोमेन दानेन तिलान्नेन च भोजयेत् ॥ (शिवपुराण, विध्येश्वर संहिता) *, * शनैश्चर अल्पमृत्यु का निवारण करने वाला है, उस दिन बुद्धिमान पुरुष रुद्र आदि की पूजा करे। तिल के होम के , दान से देवताओं को संतुष्ट करके ब्राह्मणों को तिलमिश्रित अन्न भोजन कराएं। *,* स्कन्दपुराण के अनुसार श्रावण शनिवार को हनुमान पूजा : *, 1. “ शनिवारे श्रावणे च अभिषेकं समाचरेत, रुद्रमंत्रेण तैलेन हनुमत्प्रीणनाय च। तैलमिश्रितसिन्दूरलेपमं तस्य समर्पयेत” रुद्रमंत्र के द्वारा तेल से हनुमान जी का अभिषेक करना चाहिए। तेल में मिश्रित सिन्दूर का लेप उन्हें समर्पित करना चाहिए। *, * 2. जपाकुसुम, आक, मंदारपुष्प की मालाओं से , नैवेद्य से उनकी पूजा करनी चाहिए। *,* 3. “जपेद्द्वादश नामानि हनुमत्प्रीतये बुधः” हनुमान जी के 12 नामों का जप करना चाहिए। *,*"हनुमानञ्जनी सूनुर्वायुपुत्रो महाबल:। रामेष्ट: फाल्गुनसख: पिङ्गाक्षोमितविक्रम:।। *,* उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशन:। * * लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा।। " *, * जो मनुष्य प्रातःकाल उठकर इन बारहनामों को पढ़ता है, उसका अमंगल नहीं होता और उसे सभी सम्पदा सुलभ हो जाती है। *, * 4. हनुमान जी के मंदिर में हनुमत्कवच का पाठ करना चाहिए।*,*“ श्रावणे मंदवारे तु एवमाराध्य वायुजं। वज्रतुल्यशरीरः स्यादरोगो बलवान्नरः।। *, * वेगवान्कार्यकरणे बुद्धिवैभवभूषितः। शत्रु: संक्षयमाप्नोति मित्रवृद्धि: प्रजायते।। *, * वीर्यवान्कीर्तिमांश्चैव प्रसादादंञ्जनीजने। ” *,* इस प्रकार श्रावण में शनिवार के दिन वायुपुत्र हनुमानजी की आराधना करके मनुष्य वज्रतुल्य शरीर वाला, निरोग और बलवान हो जाता है। अंजनीपुत्र की कृपा से वह कार्य करने में वेगवान, तथा बुद्धि वैभव से युक्त हो जाता है, उसके शत्रु नष्ट हो जाते हैं, मित्रों की वृद्धि होती है और वह वीर्यवान तथा कीर्तिमान हो जाता है। *
* स्कन्दपुराण के अनुसार श्रावण शनिवार को शनि पूजा:*
* शनि की प्रसन्नता के लिए एक लंगड़े ब्राह्मण और उसके अभाव में किसी ब्राह्मण के शरीर में तिल का तेल लगाकर उसे उष्ण जल से स्नान कराना चाहिए और श्रद्धायुक्त होकर खिचड़ी उसे खिलाना चाहिए। तत्पश्च्यात तेल, लोहा, काला तिल, काला उडद, काला कंबल, प्रदान करना चाहिए। इसके बाद व्रती यह कहे कि मैंने यह सब शनि की प्रसन्नता के लिए किया है, शनिदेव मुझपर प्रसन्न हों। तदनन्तर तिल के तेल से शनि का अभिषेक कराना चाहिए। उनके पूजन मेजन तिल तथा उड़द के अक्षत प्रशस्त माने गए हैं। *, *उसके बाद शनि का ध्यान करें: *, शनैश्चरः कृष्णवर्णो मन्दः काश्यपगोत्रजः। *, सौराष्ट्रदेशसम्भूतः सूर्यपुत्रो वरप्रदः। दण्डाकृतिर्मण्डले स्यादिन्द्रनीलसमद्युतिः। *, बाणबाणासनधरः शूलधृग्गृध्रवाहनः। यमाधिदैवतश्चैव ब्रह्मप्रत्यधिदैवतः। *, कस्तूर्यगुरुगन्ध: स्यात्तथा गुग्गुलुधूपकः। कृसरान्नप्रियश्चैव विधिरस्य प्रकीर्तितः। *, * पूजा में कृष्ण वस्तु (काली वस्तु) का दान करना चाहिये । ब्राह्मण को काले रंग के दो वस्त्र देने चाहिए और काले बछड़े सहित काली गौ प्रदान करनी चाहिए । *
* शनि पूजन में वैदिक मंत्र: *
* ॐ  शन्नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। *, शंयोरभिस्र वन्तु न:। ॐ शनैश्चराय नम:। *, * भगवान् शिव, शनिदेव के गुरु हैं। शिव ने ही शनि को न्यायाधीश का पद सौंपा था जिसके फलस्वरूप शनि देव मनुष्य/देव/पशु सभी को कर्मों के अनुसार फल देते हैं। इसलिए श्रावण के महीने में जो भी भगवान् शिव के साथ साथ शनि की उपासना करता है उसको शनि के शुभ फल प्राप्त होते हैं। भगवान् शिव के अवतार पिप्पलाद, भैरव तथा रुद्रावतार हनुमान जी की पूजा भी शनि के प्रकोप से रक्षा करती है । *


Thursday, 16 August 2018

~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~* दिनांक - 16 अगस्त 2018 *, * दिन – गुरुवार ..... vinay Kumar

* दिनांक - 16 अगस्त 2018 *,  * दिन गुरुवार *, * विक्रम संवत – 2075 *, * शक संवत -1940 *, * अयन दक्षिणायन *, * ऋतु वर्षा *, * मास श्रावण *, * पक्ष शुक्ल *, * तिथि - 17/8 रात्रि 01:02 तक षष्ठी *, * नक्षत्र - शाम 03:49 तक चित्रा *, * योग - शाम 04:50 तक शुभ *, * राहुकाल - दोपहर 02:07 से 03:43 *, * सूर्योदय - 06:18 *, * सूर्यास्त - 19:07 *, * दिशाशूल - दक्षिण दिशा में *, * व्रत पर्व विवरण - कल्कि जयंती *, * विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) *,
 * विष्णुपदी संक्रांति *
 * 17 अगस्त 2018 शुक्रवार को  (पुण्यकाल : सुबह 06:52 से  दोपहर 01:16 तक) विष्णुपदी संक्रांति है। *, * (विष्णुपदी संक्रांति में किये गये जप-ध्यान व पुण्यकर्म का फल लाख गुना होता है । - पद्म पुराण) *, * शिव के द्वादश बारह ज्योतिर्लिंग की कथा और महत्त्व *, * 12 ज्योतिर्लिंगों का महत्व व महिमा *, * भगवान शिव की भक्ति का महीना सावन शुरू हो चुका है । शिवमहापुराण के अनुसार एकमात्र भगवान शिव ही ऐसे देवता हैं, जो निष्कल व सकल दोनों हैं । यही कारण है कि एकमात्र शिव का पूजन लिंग व मूर्ति दोनों रूपों में किया जाता है। भारत में 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंग हैं। इन सभी का अपना महत्व व महिमा है । *, * ऐसी मान्यता भी है कि सावन के महीने में यदि भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों के दर्शन किए जाएं तो जन्म-जन्म के कष्ट दूर हो जाते हैं । यही कारण है कि सावन के महीने में भारत के प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। आज हम आपको बता रहे हैं
 इन 12 ज्योतिर्लिंगों का महत्व व महिमा-: *
* 1] सोमनाथ : सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भारत का ही नहीं अपितु इस पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है । यह मंदिर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है । इस मंदिर के बारे में मान्यता है, कि जब चंद्रमा को दक्ष प्रजापति ने श्राप दिया था, तब चंद्रमा ने इसी स्थान पर तप कर इस श्राप से मुक्ति पाई थी । ऐसा भी कहा जाता है कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं चन्द्र देव ने की थी। विदेशी आक्रमणों के कारण यह 17 बार नष्ट हो चुका है। हर बार यह बिगड़ता और बनता रहा है । *, * 2] मल्लिकार्जुन : यह ज्योतिर्लिंग आंध्रप्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित है । इस मंदिर का महत्व भगवान शिव के कैलाश पर्वत के समान कहा गया है । अनेक धार्मिक शास्त्र इसके धार्मिक और पौराणिक महत्व की व्याख्या करते हैं । *, * कहते हैं कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से ही व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है । एक पौराणिक कथा के अनुसार जहां पर यह ज्योतिर्लिंग है, उस पर्वत पर आकर शिव का पूजन करने से व्यक्ति को अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होते हैं । *, * 3] महाकालेश्वर ज्यो तिर्लिंग : यह ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश की धार्मिक राजधानी कही जाने वाली उज्जैन नगरी में स्थित है । महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषता है कि ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है । यहां प्रतिदिन सुबह की जाने वाली भस्मारती विश्व भर में प्रसिद्ध है। महाकालेश्वर की पूजा विशेष रूप से आयु वृद्धि और आयु पर आए हुए संकट को टालने के लिए की जाती है । उज्जैनवासी मानते हैं कि भगवान महाकालेश्वर ही उनके राजा हैं और वे ही उज्जैन की रक्षा कर रहे हैं । *, 4] ओंकारेश्वर : ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शहर इंदौर के समीप स्थित है। जिस स्थान पर यह ज्योतिर्लिंग स्थित है, उस स्थान पर नर्मदा नदी बहती है और पहाड़ी के चारों ओर नदी बहने से यहां ऊं का आकार बनता है । ऊं शब्द की उत्पति ब्रह्मा के मुख से हुई है । इसलिए किसी भी धार्मिक शास्त्र या वेदों का पाठ ऊं के साथ ही किया जाता है । यह ज्योतिर्लिंग ॐकार अर्थात ऊं का आकार लिए हुए है, इस कारण इसे ओंकारेश्वर नाम से जाना जाता है । *, * 5] केदारनाथ : केदारनाथ स्थित ज्योतिर्लिंग भी भगवान शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में आता है । यह उत्तराखंड में स्थित है । बाबा केदारनाथ का मंदिर बद्रीनाथ के मार्ग में स्थित है । केदारनाथ समुद्र तल से ३५८४ मीटर की ऊँचाई पर स्थित है । केदारनाथ का वर्णन स्कन्द पुराण एवं शिव पुराण में भी मिलता है । यह तीर्थ भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है । जिस प्रकार कैलाश का महत्व है उसी प्रकार का महत्व शिव जी ने केदार क्षेत्र को भी दिया है । *, *6] भीमाशंकर : भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पूणे जिले में सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है । भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है । इस मंदिर के विषय में मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा से इस मंदिर का दर्शन प्रतिदिन सुबह सूर्य निकलने के बाद करता है, उसके सात जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं तथा उसके लिए स्वर्ग के मार्ग खुल जाते हैं । *, * 7] काशी विश्वनाथ: विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है । यह उत्तर प्रदेश के काशी नामक स्थान पर स्थित है । काशी सभी धर्म स्थलों में सबसे अधिक महत्व रखती है । इसलिए सभी धर्म स्थलों में काशी का अत्यधिक महत्व कहा गया है । इस स्थान की मान्यता है कि प्रलय आने पर भी यह स्थान बना रहेगा । इसकी रक्षा के लिए भगवान शिव इस स्थान को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेंगे और प्रलय के टल जाने पर काशी को उसके स्थान पर पुन: रख देंगे । *, *8] त्र्यंबकेश्वर : यह ज्योतिर्लिंग गोदावरी नदी के करीब महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित है । इस ज्योतिर्लिंग के सबसे अधिक निकट ब्रह्मागिरि नाम का पर्वत है । इसी पर्वत से गोदावरी नदी शुरू होती है । भगवान शिव का एक नाम त्र्यंबकेश्वर भी है । कहा जाता है कि भगवान शिव को गौतम ऋषि और गोदावरी नदी के आग्रह पर यहां ज्योतिर्लिंग रूप में रहना पड़ा । *, *9] वैद्यनाथ : श्री वैद्यनाथ शिवलिंग का समस्त ज्योतिर्लिंगों की गणना में नौवां स्थान बताया गया है । भगवान श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का मन्दिर जिस स्थान पर अवस्थित है, उसे वैद्यनाथ धाम कहा जाता है । यह स्थान झारखंड राज्य (पूर्व में बिहार ) के देवघर जिला में पड़ता है । * ,* 10] नागेश्वर ज्योतिर्लिंग : यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के बाहरी क्षेत्र में द्वारिका स्थान में स्थित है। धर्म शास्त्रों में भगवान शिव नागों के देवता है और नागेश्वर का पूर्ण अर्थ नागों का ईश्वर है । भगवान शिव का एक अन्य नाम नागेश्वर भी है । द्वारका पुरी से भी नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की दूरी १७ मील की है । इस ज्योतिर्लिंग की महिमा में कहा गया है कि जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां दर्शन के लिए आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है । *, * 11] रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग : यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरं नामक स्थान में स्थित है । भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के साथ-साथ यह स्थान हिंदुओं के चार धामों में से एक भी है। इस ज्योतिर्लिंग के विषय में यह मान्यता है कि इसकी स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी। भगवान राम के द्वारा स्थापित होने के कारण ही इस ज्योतिर्लिंग को भगवान राम का नाम रामेश्वरम दिया गया है । *, *12] घृष्णेश्वर मन्दिर : घृष्णेश्वर महादेव का प्रसिद्ध मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के समीप दौलताबाद के पास स्थित है । इसे घृसणेश्वर या घुश्मेश्वर के नाम से भी जाना जाता है । दूर-दूर से लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं और आत्मिक शांति प्राप्त करते हैं । भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से यह अंतिम ज्योतिर्लिंग है । बौद्ध भिक्षुओं द्वारा निर्मित एलोरा की प्रसिद्ध गुफाएं इस मंदिर के समीप स्थित हैं। यहीं पर श्री एकनाथजी गुरु व श्री जनार्दन महाराज की समाधि भी है । *


Wednesday, 15 August 2018

एयरोफ्लाई ने धूम - धाम से मनाया तीज व स्वतंत्रता दिवस

एयरोफ्लाई ने धूम - धाम से मनाया तीज व स्वतंत्रता दिवसतीज और देश भक्ति के गीतों से गूंजा सारा माहोल


विनय कुमार
चण्डीगढ़                                                      
    पंजाबी सभ्यता और संस्कृति को दर्शाता त्यौहार तीज और भारत की आन - बान और शान की खातिर मर-मिटने वाले सेनिकों के कारण मिली 15 अगस्त, स्वतंत्रता की ख़ुशी के दिवस को शिक्षण संस्थान एयरोफ्लाई अकादमी द्वारा सेक्टर -17 स्थित अपने परिसर में आयोजक राहुल सलारिया, जागृति मेहता, मोनिका ने अपने अन्य साथियों स्मिता शर्मा, शमा सेंडलस के साथ मनाया । संस्थान की छात्राओं ने इन दोनों सांस्कृतिक एवं देशभक्ति के त्योहारों को एक साथ ढोल - धमाके के साथ नाच- गाकर खूब जश्न मनाया । स्वाति शर्मास्मिताशमां एवं मोनिका आदि ने सूंदर प्रस्तुतियां दीं ।  
     संस्थापक राहुल सलारिया ' बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ की सोच के तहत इस संस्थान को चला रहे हैँ '  इस मौके पर संस्थान के संचालकों जागृति मेहता ने बताया कि उनके संस्थान ,को शुरू हुए महज चार माह हुए हैं व अपनी तरह की अनूठी पहल करते हुए उन्होंने बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत यहां 90% लड़कियों को दाखिला दिया है व उनमें भी अधिकतर ग्रामीण व पिछड़े वर्ग से हैं । एयरोफ्लाई में मिलने वाली शिक्षा को लेकर बच्चों में बढती उत्सुकता के चलते संस्थान में अच्छा मुकाम हासिल करने वाली छात्राओं को संचालक 50 हज़ार से लेकर एक लाख रुपय तक की छात्रवृति भी प्रदान करतें हैं l   
एन टी 24 न्यूज़ से बातचीत करते हुए राहुल सलारिया ने बतया के बच्चों को + 2 करने के बाद ये नही मालूम होता के अब वे किस तरफ अपने कदम बढाये l इसी के चलते एयरोफ्लाई में अपना करियर बनाने के बारे में पूरी जानकरी देने को इस संस्थान को आयोजित किया गया है l





    


       


Tuesday, 14 August 2018

जनरल हॉस्पिटल का मुलाजिम करंट आने से घायल


जनरल हॉस्पिटल का मुलाजिम करंट आने से घायल




एन टी 24 न्यूज़
चंडीगढ़
जनरल हॉस्पिटल सेक्टर 16 चंडीगढ़ में कंट्रेक्ट पर काम करने वाला मुलाजिम जब दीवार को पानी से साफ कर रहा था l दिवार में करंट आने से रोहित नाम का मुलाजिम घायल हो गया l रोहित ने बताया कि हॉस्पिटल प्रशासन के कहने पर मैं दीवार को पानी से साफ कर रहा था और मुझे करंट लगा और करंट लगने से मैं बेयोश हो गया l मेरा एक हाथ जल गया कॉर्डिनेशन कमेटी के कनवीनर अश्वनी कुमार ने कहा एकता कंट्रेक्ट वर्कर यूनियन  जी एम एस एच जो कॉर्डिनेशन कमेटी के साथ ऐफीलेटीड है उन्होंने जब कॉर्डिनेशन कमेटी को बुलाया जहां देखा के हॉस्पिटल प्रशासन का कोई भी अधिकारी घायल रोहित
का हाल पूछने नहीं आया तो कमेटी ने यहां रोष प्रदर्शन किया और मेडिकल सुपरीडेंट डॉक्टर सतवीर ने दखलअंदाजी की और रोष प्रदर्शन कर रहे नेताओं को बुलाकर बात की और वादा किया के सोमवार को 9:30 बजे मीटिंग बुलाई जाएगी उस में सभी नरसींग सुपरीडैंट  को बुलाकर बात की जाएगी जिससे एसी घटनाएं हॉस्पिटल में फिर कभी ना हो l इस मीटिंग में मूलाजिम  नेताओं को भी बुलाया गया है l

Sunday, 12 August 2018

~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ : दिनांक - 13 अगस्त 2018 *, * दिन – सोमवार .... Vinay Kumar


* दिनांक - 13 अगस्त 2018 *, * दिन – सोमवार *, * विक्रम संवत – 2075 *,* शक संवत -1940 *, * अयन – दक्षिणायन *, * ऋतु – वर्षा *, * मास – श्रावण *, * पक्ष – शुक्ल *, * तिथि - सुबह 08:37 से तृतीया *, * नक्षत्र - शाम 07:10 तक पूर्वाफाल्गुनी *, * योग - रात्रि 12:22 तक शिव *, * राहुकाल - सुबह 07:42 से 09:18 *, * सूर्योदय - 06:16 *, * सूर्यास्त - 19:11 *, * दिशाशूल - पूर्व दिशा में * ,* व्रत पर्व विवरण - मधुश्रवा-ठकुरानी-हरियाली तृतीया, शिवपूजनारम्भ, तृतीया क्षय तिथि * , * विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है एवं तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) *
* मंगलवारी चतुर्थी *
* 14 अगस्त 2018 ( पुण्यकाल सूर्योदय से 15 अगस्त प्रात: 03:30 तक ) *, * मंत्र जप व शुभ संकल्प की सिद्धि के लिए विशेष योग *, * मंगलवारी चतुर्थी को किये गए जप-संकल्प, मौन व यज्ञ का फल अक्षय होता है । *, * मंगलवार चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना ... जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है... *
* मंगलवारी चतुर्थी *
* अंगार चतुर्थी को सब काम छोड़ कर जप-ध्यान करना जप, ध्यान, तप सूर्य-ग्रहण जितना फलदायी है… *,* बिना नमक का भोजन करें *, * मंगल देव का मानसिक आह्वान करो *, * चन्द्रमा में गणपति की भावना करके अर्घ्य दें *, * कितना भी कर्ज़दार हो..काम धंधे से बेरोजगार हो ..रोज़ी रोटी तो मिलेगी और कर्जे से छुटकारा मिलेगा | *
* नागपंचमी *
* श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है । इस बार ये पर्व 15 अगस्त, बुधवार को है । इस दिन नागों की पूजा करने का विधान है । हिंदू धर्म में नागों को भी देवता माना गया है । महाभारत आदि ग्रंथों में नागों की उत्पत्ति के बारे में बताया गया है । इनमें शेषनाग, वासुकि, तक्षक आदि प्रमुख हैं । नागपंचमी के अवसर पर हम आपको ग्रंथों में वर्णित प्रमुख नागों के बारे में बता रहे हैं - *
* वासुकि नाग *
* धर्म ग्रंथों में वासुकि को नागों का राजा बताया गया है । ये हैं भगवान शिव के गले में लिपटे रहते हैं । (कुछ ग्रंथों में महादेव के गले में निवास करने वाले नाग का नाम तक्षक भी बताया गया है) । ये महर्षि कश्यप व कद्रू की संतान हैं। इनकी पत्नी का नाम शतशीर्षा है । इनकी बुद्धि भगवान भक्ति में लगी रहती है । जब माता कद्रू ने नागों को सर्प यज्ञ में भस्म होने का श्राप दिया तब नाग जाति को बचाने के लिए वासुकि बहुत चिंतित हुए । तब एलापत्र नामक नाग ने इन्हें बताया कि आपकी बहन जरत्कारु से उत्पन्न पुत्र ही सर्प यज्ञ रोक पाएगा । *, * तब नागराज वासुकि ने अपनी बहन जरत्कारु का विवाह ऋषि जरत्कारु से करवा दिया । समय आने पर जरत्कारु ने आस्तीक नामक विद्वान पुत्र को जन्म दिया। आस्तीक ने ही प्रिय वचन कह कर राजा जनमेजय के सर्प यज्ञ को बंद करवाया था । धर्म ग्रंथों के अनुसार, समुद्र मंथन के समय नागराज वासुकि की नेती (रस्सी) बनाई गई थी। त्रिपुरदाह (इस युद्ध में भगवान शिव ने एक ही बाण से राक्षसों के तीन पुरों को नष्ट कर दिया था) के समय वासुकि शिव धनुष की डोर बने थे । *
* शेषनाग *
* शेषनाग का एक नाम अनंत भी है । शेषनाग ने जब देखा कि उनकी माता कद्रू व भाइयों ने मिलकर विनता (ऋषि कश्यप की एक और पत्नी ) के साथ छल किया है तो उन्होंने अपनी मां और भाइयों का साथ छोड़कर गंधमादन पर्वत पर तपस्या करनी आरंभ की । उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा ने उन्हें वरदान दिया कि तुम्हारी बुद्धि कभी धर्म से विचलित नहीं होगी । *, * ब्रह्मा ने शेषनाग को यह भी कहा कि यह पृथ्वी निरंतर हिलती-डुलती रहती है, अत: तुम इसे अपने फन पर इस प्रकार धारण करो कि यह स्थिर हो जाए । इस प्रकार शेषनाग ने संपूर्ण पृथ्वी को अपने फन पर धारण कर लिया । क्षीरसागर में भगवान विष्णु शेषनाग के आसन पर ही विराजित होते हैं । धर्म ग्रंथों के अनुसार, भगवान श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण व श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम शेषनाग के ही अवतार थे । *
शेष कल.........
* मंगलवार चतुर्थी *
* भारतीय समय के अनुसार 14 अगस्त 2018 को (सूर्योदय से 15 अगस्त प्रातः 03:30 तक) चतुर्थी है, इस महा योग पर अगर मंगल ग्रह देव के 21 नामों से सुमिरन करें और धरती पर अर्घ्य देकर प्रार्थना करें, शुभ संकल्प करें तो आप सकल ऋण से मुक्त हो सकते हैं.. *
* मंगल देव के 21 नाम इस प्रकार हैं :- *
* 1)  ॐ मंगलाय नमः *, * 2) ॐ भूमि पुत्राय नमः *, *3 ) ॐ ऋण हर्त्रे नमः *, * 4) ॐ धन प्रदाय नमः *, *5 ) ॐ स्थिर आसनाय नमः *, * 6) ॐ महा कायाय नमः *, * 7) ॐ सर्व कामार्थ साधकाय नमः *, * 8) ॐ लोहिताय नमः *, * 9) ॐ लोहिताक्षाय नमः *, * 10) ॐ साम गानाम कृपा करे नमः *, * 11) ॐ धरात्मजाय नमः *, * 12) ॐ भुजाय नमः *, * 13) ॐ भौमाय नमः *, * 14) ॐ भुमिजाय नमः *, * 15) ॐ भूमि नन्दनाय नमः *, * 16) ॐ अंगारकाय नमः *, * 17) ॐ यमाय नमः *, * 18) ॐ सर्व रोग प्रहाराकाय नमः *, * 19) ॐ वृष्टि कर्ते नमः *, * 20) ॐ वृष्टि हराते नमः *, * 21) ॐ सर्व कामा फल प्रदाय नमः *, * ये 21 मन्त्र से भगवान मंगल देव को नमन करें  ..फिर धरती पर अर्घ्य देना चाहिए..अर्घ्य देते समय ये मन्त्र बोले :- *, * भूमि पुत्रो महा तेजा *, * कुमारो रक्त वस्त्रका *, * ग्रहणअर्घ्यं मया दत्तम *, * ऋणम शांतिम प्रयाक्ष्मे *, * हे भूमि पुत्र!..महा क्यातेजस्वी,रक्त वस्त्र धारण करने वाले देव मेरा अर्घ्य स्वीकार करो और मुझे ऋण से शांति प्राप्त कराओ……...*



Wednesday, 8 August 2018

नाग पंचमी पर विशेष .... vinay kumar

शुभ पूजन महूरत सुबह 05:55 से 8:31 तक
जाने मदन गुप्ता सपाटू ज्योतिषविद् से इसके उपाए 

एन टी 24 न्यूज़ 
चंडीगढ़ 

नाग पंचमी पर विशेष 

नाग पंचमी पर करें कालसर्प दोष से मुक्ति के उपाय 
     इस वर्ष 2 अगस्त को नागपंचमी राजस्थान व उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों  में मनाई जा चुकी है जबकि पंजाब, हरियाणा व हिमाचल आदि में इसे 15 अगस्त को मनाया जाएगी। सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है। कुछ लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं.. हिन्दू धर्म में सर्पों के पूजन का खास महत्व है. दरअसल, सर्पों को भगवान शंकर का गहना माना जाता है और कहा जाता है कि सर्पों की पूजा से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं और मनवांछित फल देते हैं. ऐसी भी मान्यता है कि हमारे पूर्वज सर्पों का रूप धारण कर धरती पर आते हैं l इस बार 15 अगस्त के दिन नागपंचमी पर स्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। ज्योतिष में इस योग को बहुत ही शुभ योग माना गया है। नागपंचमी पर पूजा का मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर शाम को 4 बज कर 13 मिनट तक रहेगा। पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त – 15 अगस्त को सुबह 05:55 से 8:31 तक l  पंचमी तिथि प्रारंभ – 15 अगस्त को सुबह 03:27 बजे शुरू, पंचमी तिथि समाप्ति – 16 अगस्त को सुबह 01:51 बजे खत्म l 
ऐसे करें नागों के देवता की पूजा:-
– सबसे पहले प्रात: घर की सफाई कर स्नान कर लें, इसके बाद प्रसाद के लिए सेवई और चावल बना लें, इसके बाद एक लकड़ी के तख्त पर नया कपड़ा बिछाकर उस पर नागदेवता की मूर्ति या तस्वीर रख दें, फिर जल, सुगंधित फूल, चंदन से अर्ध्य दें, नाग प्रतिमा का दूध, दही, घृ्त, मधु ओर शर्कर का पंचामृ्त बनाकर स्नान कराएं, प्रतिमा पर चंदन, गंध से युक्त जल अर्पित करें, नये वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, हरिद्रा, चूर्ण, कुमकुम, सिंदूर, बेलपत्र, आभूषण और पुष्प माला, सौभाग्य द्र्व्य, धूप दीप, नैवेद्ध, ऋतु फल, तांबूल चढ़ाएं  l 
ऐसे दूर करें कालसर्प दोष
कालसर्प दोष को दूर करने के लिए यह दिन बहुत विशेष माना जाता है। इस दिन नागों की पूजा और ऊं नम: शिवाय का जप करना फलदायी होता है। इसके अलावा इस दिन पर रुद्राभिषेक करने से भी जातक की कुंडली से कालसर्प दोष दूर हो जाता है। वैसे तो सावन के महीने का हर दिन भगवान भोलेशंकर का दिन होता है। पूरे महीने कृपानिधान शिव शंकर कृपा बरसाते हैं लेकिन इस दिन नागपंचमी का दिन बेहद ही खास है क्योंकि इस दिन भगवान आशुतोष का प्रिय आभूषण उनके गले का हार यानि नाग देवता की पूजा करके आप अपनी हर मनोकामना को पूरा कर सकते हैं। यही नहीं यदि आप कालसर्प दोष से ग्रसित हैं तो इस दिन उसका भी निवारण किया जा सकता है। वेद और पुराणों में नागों का उद्गम महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी कद्रू से माना गया है। शेषनाग की शय्या महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी कद्रू वेद और पुराणों में नागों का उद्गम महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी कद्रू से माना गया है। भगवान विष्णु भी शेषनाग की शय्या पर लेटे हैं। इसलिए भी इनकी पूजा होती है। हिन्दू धर्म में हर पशु- पक्षी को किसी न किसी देवी या देवता से जोड़ा गया है। भगवान शिव के गले में नाग होने से इसकी पूजा आदिकाल से की जा रही है। और इस पर्व को नाग पंचमी कहा जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर नाग पूजन से मनोकामना पूर्ण होती है। भारत के कई क्षेत्रों में व्रत भी रखे जाते हैं। ग्रामीण अंचलों में  इस दिन दीवारों पर सात नागों के चित्र बना क उनका पूजन किया जाता है। एक रस्सी में 7 गाठें लगाकर सर्प की आकृति बनाई जाती है और  विधिवत् निम्न मंत्र से पूजन किया जाता है।, ! अनन्तम्ं वासुकि, शेषम, पदनाभम्, चकभ्बलम्,कींटकम, तक्षक्म् !! इसके अतिरिक्त नवनाग स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है। चांदी का नाग बना कर मध्यमा में धारण किया जा सकता है। शिवलिंग पर तांबे का सर्प अनुष्ठानपूर्वक चढ़ाया जा सकता है। तांबे के लोटे में नाग के जोड़े डाल कर ,बहते जल में प्रवाहित किये जा सकते हैं। इस दिन राहु यंत्र भी रखा जा सकता है।  काल सर्प दोष निवारण यन्त्र स्थापित एवं धारण किया जा सकता है। यह अवसर काल सर्प दोष की शान्ति पूजा करवाने के लिए सर्वथा उचित होता है ।
      मंदिर में ऐसी पूजा का विशेष प्रावधान भी किया जाता है। किसी कारण सुयोग्य कर्मकांडी उपलब्ध न हो तो आप खुद भी ओम् रां राहुवे नम: मन्त्र का या ओम  कुरूकुल्ये हुं पट स्वाहा 108 बार जाप करके शिव प्रतिमा पर दुग्ध ,नाग नागिन की प्रतिमाएं आदि अर्पित कर सकते हैं। इस दिन काले तिल, काले उड़द,काली राई, नीला वस्त्र, जामुन, काला साबुन, कच्चे कोयले, सिक्का-रांगा या लैड आदि  दान अथवा चलते पानी में प्रवाहित करने से विशेष लाभ मिलता है। ओम् रां राहवे नम: तथा ओम कें केतवे नम: का 108 बार जाप करें। पुष्य नक्षत्र या सोमवार को महादेव पर जल एवं दूध चढ़ाएं । महामृत्युंज्य मंत्र का जाप करें या कैसेट सुनें।  ओम नम: शिवाय का जाप करें । मध्यमा में नाग की अंगूठी पहनें । । काल सर्प योग की अंगूठी, लाकेट, यंत्र , गोमेद या लहसुनिया की अंगूठी धारण की  जा सकती है। 500 ग्राम का पारद शिवलिंग बनवा के रुद्राभिषेक कराएं। ओम नमोस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथ्वीमनु, ये अंतरिक्षे ये दिवितेभ्य: सर्पेभ्यो नम: स्वाहा  !! का 31000 मन्त्र जाप करें। मंगल या शनिवार हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर, चमेली का तेल, लाल चोला या झंडा चढ़ाएं। महामृत्युंज्य मंत्र की एक माला करें या श्रावण मास

एक कदम स्वछता की ओर... vinay kumar


" एक कदम स्वछता की ओर "



एन टी 24 न्यूज़ 

चंडीगढ़
स्वच्छ भारत का नारा " एक कदम स्वछता की ओरस्वछता का एक नज़ारा हमे 2 दिन पहले ही चंडीगढ़ सेक्टर 20 स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के बाहर देखने को मिला जहाँ पर कूड़ा दान लगे होने के बाबजूद कूड़ा करकट ज़मीं पर बिखरा हुआ था l कारण डस्टबिन का भरा हुआ होना l नगर निगम अधिकारीयों को हम इस फोटो के ज़रिये से ये बताना चाहते हैं के अगर वे अपने सफाई कर्मचारियों को हिदायत दें के वह रोज़ाना अपने - अपने सेक्टर की देख - रेख ओर साफ़ - सफाई की ओर ध्यान तो मन्दिर के साथ - साथ सेक्टर  भी साफ़ सुथरा सा दिखने लगेगा

Monday, 6 August 2018

“ हेल्थ सीनैरियो इन इंडिया एंड रोल ऑफ अफोर्डेबल मेडिसिन ” ... ललित बजाज

आम जनता को कैमिस्ट से मिलेगी सस्ती दवाइयां, दवा कम्पनिया बेबस “ हेल्थ सीनैरियो इन इंडिया एंड रोल ऑफ अफोर्डेबल मेडिसिन ” विषय पर विशेष सत्र आयोजित
एन टी24 न्यूज़
चंडीगढ़
    मैनेजमेंट एसोसिएशन (सीएमए) द्वारा हेल्थ सीनैरियो इन इंडिया एंड रोल ऑफ अफोर्डेबल मेडिसिन विषय पर सेक्टर 18 स्थित रोटरी हाऊस में एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। सीएमए के अध्यक्ष ललित बजाज ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि मुख्य वक्ता डॉ. बेस्ट फार्माक्यूटिकल बद्दी के सीईओ अश्वनी भल्ला व एमडी राजेश ढींगरा थे जबकि ऑल इंडिया रेडियो, चण्डीगढ़ के सीनियर ब्रॉडकास्टर सर्वप्रिय निर्मोही पैनल मॉडरेटर के तौर पर मौजूद थे । सत्र में वक्ताओं ने बेबाक व स्पष्ट शब्दों में अपने अनुभवों को उपस्थित जनों से सांझा करते हुए बताया कि किस प्रकार नीम हकीम एवं केमिस्ट तक भी प्रैक्टिशनर डॉक्टर्स की भूमिका में आ जातें हैं। उन्होंने आम जनता को सस्ती दवाइयां मुहैया कराने के मामले में केमिस्टों के आगे दवा कंपनियों को बेबस बताया । 

Sunday, 5 August 2018

CMA conducted a panel discussion on “ Health scenario in India and Role of Affordable medicines”

CMA conducted a panel discussion on
 “ Health scenario in India and Role of Affordable medicines” 

NT24 News
Chandigarh 
Chandigarh Management Association conducted a panel discussion on “ Health scenario in India and Role of Affordable medicines” at Rotary House Sector 18 Chandigarh on 04th Aug 2018. Key Note Speakers in the seminar were Mr Rajesh Dhingra MD of Dr Best Pharmaceuticals Pvt Limited and with Mr Ashwani Bhalla CEO of Dr Best Pharmaceuticals Pvt Limited On this event Sh Sarvpriya Nirmohi Senior Broadcaster All India Radio was moderator.  All the speakers shared their experience in a lucid, comprehensive candid and forthright manner. Practical examples from the society where quacks and chemists also sometime play the role of a doctor were given. 
   Lalit Bajaj President CMA welcomed and thanked the guests on behalf of Chandigarh Management Association and gave a brief introduction of Mr Rajesh Dhinra and Mr Ashwani Bhalla CEO of Dr Best and Sh S B Khullar Proposed a vote of thanks on this occasion.