अभिनेत्री एवं फिल्म निर्माता सविता भट्टी ने किया कवितावली के दिसंबर अंक का अनावरण
चण्डीगढ़, विनय : हिन्दी साहित्य की समृद्ध और सतत् प्रवहमान परंपरा को नई ऊर्जा
प्रदान करती वैश्विक साहित्यिक मासिक पत्रिका कवितावली मात्र एक प्रकाशन नहीं, बल्कि
रचनाशीलता का एक जीवंत और सार्थक उत्सव है। अप्रैल 2024 से आरंभ हुई यह पत्रिका निरंतर
प्रत्येक अंक में कविता, दोहा, मुक्तक, गीत, छंद, हाइकु, लघुकथा तथा अन्य साहित्यिक
विधाओं को एक ही मंच पर संगठित करते हुए रचनात्मक अभिव्यक्ति के नये आयाम स्थापित कर
रही है। पत्रिका के मुख्य संपादक डॉ. सुरेश पुष्पाकर का कहना है कि कवितावली हिन्दी
भाषा के प्रेरणास्रोत, सौन्दर्य-बोध और सांस्कृतिक गौरव का समन्वित स्वरूप है—एक ऐसा
मंच जो साहित्य को वैश्विक पटल पर सार्थकता और सम्मान के साथ प्रस्तुत करता है। इसी
अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा प्राप्त पत्रिका के दिसंबर अंक का लोकार्पण चण्डीगढ़ में
प्रसिद्ध अभिनेत्री एवं फिल्म निर्माता तथा हास्य-व्यंग्य के प्रतीक दिवंगत जसपाल भट्टी
की धर्मपत्नी सविता भट्टी द्वारा सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के आरंभ में ‘कवितावली’ की जापान प्रमुख सुदेश मोदगिल नूर, जो इन दिनों भारत
प्रवास पर हैं तथा संयुक्त संपादक डॉ. संतोष गर्ग ने मुख्य अतिथि का सुसज्जित सुमन-गुच्छ
अर्पित कर गरिमामय स्वागत किया। संक्षिप्त वार्तालाप के क्रम में डॉ. सुरेश पुष्पाकर
के प्रश्नों का उत्तर देते हुए सविता भट्टी
ने बताया कि किस प्रकार एक अप्रत्याशित जीवन-घटना ने उन्हें अभिनय-जगत की ओर अग्रसर
किया। उन्होंने यह भी साझा किया कि दिवंगत जसपाल भट्टी ने ‘नॉनसेंस क्लब’ के मंच से समय-समय पर सामाजिक
विसंगतियों और जन-समस्याओं को नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से अत्यंत प्रभावी रूप से उठाया।
कई बार परिस्थितियाँ पीड़ा जनक और चुनौतीपूर्ण होने पर भी वे समाज-जागरण के अपने संकल्प
से कभी विचलित नहीं हुए। समारोह के समापन पर पत्रिका के सलाहकार संपादक डॉ. विजय कपूर
ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कहा कि साहित्य वह अमर ज्योति है, जिसे कोई दूरी, कोई माध्यम,
कोई व्यवधान रोक नहीं सकता। जहाँ विचार, संवेदना और शब्दों का स्पर्श व्याप्त होता
है, वहाँ हृदय अपने आप समीप आ जाते हैं। इस शुभ अवसर पर विदेश व भारत के विभिन्न प्रांतों
से जुड़े संपादकीय मंडल के सदस्य— (संपादक) डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी, (सलाहकार संपादक)
डॉ. विजय कपूर, सुश्री ईनू शर्मा, (संयुक्त संपादक) अलका कांसरा, (सलाहकार) गणेश दत्त
बजाज, कमल अरोड़ा, कृष्णा गोयल, निधि मलिक व साथ ही कार्यकारिणी सदस्य मंजू अशोक राजाभोज,
मुस्कान सहगल, नीरज तंवर तथा देश-विदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकार एवं प्रबुद्धजन अपनी
गरिमामयी उपस्थिति के साथ कार्यक्रम में सहभागी बने।

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